जनसमस्या निवारण शिविर के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निराकरण करने के लिए जिला प्रशासन गरियाबंद अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। आज दिनांक 30/03/2026, दिन सोमवार को ग्राम साहेबीन कछार में एक विशेष और महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 02/04/2026 को गांव में आयोजित होने वाले विशेष जनसमस्या निवारण शिविर की तैयारियों की समीक्षा करना और ग्रामीणों की मांगों को शासन के समक्ष मजबूती से रखना था।
प्रमुख जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में बनी रणनीति
साहेबीन कछार में आयोजित इस बैठक में गांव के नेतृत्वकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता सरपंच चैतीबाई नायक ने की। उनके साथ उपसरपंच हरिहर यादव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक में गांव के विकास और मूलभूत समस्याओं पर चर्चा करने के लिए रूपसिंह मांझी, अर्जुन नायक, कुशल मरकाम, करण सिंह नाग, अशोक कुमार और कृष्ण कुमार नागेश जैसे प्रमुख नागरिकों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। इन सभी ने एक स्वर में कहा कि इस बार का जनसमस्या निवारण शिविर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर बदलाव दिखना चाहिए।
उदंती चक्काजाम और कलेक्टर का आश्वासन

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 23 जनवरी 2026 को नेशनल हाईवे 130C पर उदंती में हुए एक दिवसीय चक्काजाम से हुई थी। उस समय गरियाबंद के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री भगवान सिंह उइके (IAS) ने ग्रामीणों के बीच पहुँचकर उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी मूलभूत सुविधाओं (सड़क, बिजली, पानी) से जुड़ी समस्याओं को 3 महीने के भीतर हल कर दिया जाएगा।
चूँकि तीन महीने का समय बीत चुका है और काम की गति धीमी रही है, इसलिए ग्रामीणों ने फिर से प्रशासन को अपनी याद दिलाई। इसी का परिणाम है कि अब प्रशासन ने साहेबीन कछार में खुद पहुँचकर जनसमस्या निवारण शिविर लगाने का निर्णय लिया है।
शिविर की मुख्य मांगें और ग्रामीणों की गुहार
बैठक में सरपंच चैतीबाई नायक और उपसरपंच हरिहर यादव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि 1 अप्रैल को होने वाला यह शिविर हमारे हक की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। रूपसिंह मांझी और अर्जुन नायक ने सुझाव दिया कि सभी ग्रामीण अपने आवेदन तैयार रखें ताकि मौके पर मौजूद अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके।
प्रमुख मुद्दे जिन पर चर्चा होगी:
पेयजल संकट: गर्मी शुरू होने से पहले जल जीवन मिशन के कार्यों को पूर्ण करना।
सड़क मरम्मत: नेशनल हाईवे से गांव को जोड़ने वाली सड़कों की हालत सुधारना।
बिजली आपूर्ति: लो वोल्टेज और बार-बार बिजली गुल होने की समस्या का अंत।
सरकारी योजनाओं का लाभ: पेंशन, राशन कार्ड और कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान।
कलेक्टर भगवान सिंह उइके की पहल
कलेक्टर श्री भगवान सिंह उइके (IAS) ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस जनसमस्या निवारण शिविर में जिले के सभी आला अधिकारी उपस्थित रहेंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें और उनकी समस्याओं का निराकरण उनके अपने गांव में ही हो जाए। कुशल मरकाम, करण सिंह नाग, अशोक कुमार और कृष्ण कुमार नागेश ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही सचेत भी किया है कि वादे अब हकीकत में बदलने चाहिए।
साहेबीन कछार की यह विशेष बैठक इस बात का संकेत है कि ग्रामीण अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं। सरपंच, उपसरपंच और ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों की एकजुटता यह दर्शाती है कि आगामी 1 अप्रैल का जनसमस्या निवारण शिविर क्षेत्र के विकास के लिए एक निर्णायक साबित होगा। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


