राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद के अंतिम छोर पर विकास के दावों की खुली पोल। बेलाट नाला पर पुल और अस्पताल में डॉक्टरों की कमी ने जनता को सड़क पर उतरने पर किया मजबूर, प्रशासन को दी गई आर-पार की चेतावनी।
गरियाबंद जिले के देवभोग (झाराबहाल) से प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विकास के कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीणों की आवाज बनकर आज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने उग्र रुख अपनाते हुए नेशनल हाईवे-130 को पूरी तरह से ठप कर दिया। यह सिर्फ एक राजनीतिक चक्का जाम नहीं था, बल्कि सिस्टम की उस घोर अनदेखी के खिलाफ एक जन-आक्रोश था, जिसने इस इलाके को आज भी मूलभूत सुविधाओं से काट कर रखा है।

सांसों के लिए ओडिशा की मोहताज है यहां की जनता
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के दौर में भी किसी क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से दूसरे राज्य पर निर्भर हो? ब्लॉक अध्यक्ष भूपेंद्र मांझी ने प्रशासन की पोल खोलते हुए बताया कि यहां के अस्पताल बिना ‘मेडिसिन स्पेशलिस्ट’ के मात्र खंडहर बनकर रह गए हैं। गंभीर मरीजों को आज भी अपनी जान बचाने के लिए मजबूरन ओडिशा के अस्पतालों की ओर दौड़ना पड़ता है। इसके अलावा, शिक्षा के मंदिर भी खाली पड़े हैं— स्कूल और कॉलेजों में छात्रों का भविष्य गढ़ने के लिए प्रोफेसर तक नदारद हैं।
कागजों पर स्वीकृत पुल, हकीकत में डूबते वादे
इस उग्र प्रदर्शन की एक बड़ी वजह ‘बेलाट नाला‘ पर पुल निर्माण का वर्षों से अटका होना है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने सीधा आरोप लगाया कि पूर्व में इस पुल के निर्माण को आधिकारिक स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन लालफीताशाही के चलते आज तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। हर साल बारिश के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ते ही देवभोग का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। नतीजतन, न एंबुलेंस पहुंच पाती है, न बच्चे स्कूल जा पाते हैं और किसानों-व्यापारियों का कामकाज पूरी तरह ठप हो जाता है।
घंटों थमे रहे पहिए, प्रशासन को मिला फाइनल अल्टीमेटम

क्षेत्रीय विधायक जनकराम ध्रुव समेत कई बड़े जनप्रतिधिनियों की मौजूदगी में हुए इस जोरदार चक्का जाम के कारण हाईवे पर मीलों लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को बेकाबू होता देख अंततः प्रशासन हरकत में आया। तहसीलदार चंद्रवंशी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली।
प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अपनी ये प्रमुख मांगें रखीं:
बेलाट नाला पर तत्काल पुल का निर्माण कार्य शुरू किया जाए।
झाखरपारा में किसानों की सुविधा के लिए जिला सहकारी बैंक की स्थापना हो।
इलाके की जानलेवा और जर्जर सड़कों की तुरंत मरम्मत हो।
अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और कॉलेजों में प्रोफेसरों की स्थाई नियुक्ति हो।
अधिकारियों द्वारा पुल निर्माण प्रस्ताव को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के आश्वासन के बाद ही हाईवे से जाम हटाया गया। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने मंच से खुली चेतावनी दी है कि प्रशासन इसे महज एक ट्रेलर समझे। यदि जल्द ही इन मांगों पर जमीनी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में एक ‘महा-आंदोलन’ किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।


