‘स्वर कोकिला’ की जयंती पर प्रधानमंत्री ने किया स्मरण; कभी ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो गए थे पंडित नेहरू, जानिए लता दीदी से जुड़ा वो ऐतिहासिक किस्सा
नई दिल्ली। भारत की महान गायिका और ‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर की जन्म-जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 28 सितंबर को लता मंगेशकर की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उनके भारतीय संगीत और संस्कृति में अतुलनीय योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने लता दीदी के साथ अपने विशेष संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके भावपूर्ण गीतों के कारण वह हमेशा लोगों के दिलों और दिमाग में जीवित रहेंगी।
प्रधानमंत्री ने इससे पहले भी लता मंगेशकर को याद करते हुए कहा था कि उन्होंने अपनी दिव्य आवाज से भारत को दुनिया भर में गौरवान्वित किया। अयोध्या में लता मंगेशकर चौक के लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनके स्वर आने वाले युगों तक देश के कण-कण को जोड़ते रहेंगे।
28 सितंबर 1929 को हुआ था जन्म
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें अपने पिता और प्रसिद्ध संगीतज्ञ दीनानाथ मंगेशकर से मिली। छोटी उम्र से ही संगीत साधना शुरू करने वाली लता मंगेशकर ने आगे चलकर भारतीय फिल्म संगीत को एक नई पहचान दी।
आकाशवाणी की एक रिपोर्ट के अनुसार, लता मंगेशकर ने सात दशकों से अधिक लंबे करियर में विभिन्न भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।
‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ ने बनाया ऐतिहासिक पल
लता मंगेशकर के करियर के सबसे यादगार गीतों में ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। कवि प्रदीप के लिखे और सी. रामचंद्र के संगीतबद्ध इस देशभक्ति गीत को 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की स्मृति से जोड़ा गया।
27 जनवरी 1963 को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में लता मंगेशकर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी में यह गीत प्रस्तुत किया। आकाशवाणी के अनुसार, गीत सुनकर नेहरू भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए।
लता मंगेशकर ने बाद में इस मुलाकात को याद करते हुए बताया था कि कार्यक्रम के बाद नेहरू ने उनसे अलग से मुलाकात की। उनके अनुसार, नेहरू की आंखों में आंसू थे और उन्होंने कहा था कि लता ने उन्हें रुला दिया। यह प्रसंग लता मंगेशकर की आवाज के भावनात्मक प्रभाव से जुड़े चर्चित किस्सों में शामिल है।
लता की आवाज बनी देश की भावनाओं की आवाज
‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ के अलावा लता मंगेशकर ने हिंदी सिनेमा और भारतीय संगीत को अनेक यादगार गीत दिए। ‘आएगा आने वाला’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘लग जा गले’, ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’, ‘तेरे लिए’, ‘नाम गुम जाएगा’ जैसे गीतों ने कई पीढ़ियों के श्रोताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी गायकी की खासियत केवल आवाज की मिठास नहीं थी, बल्कि गीत के भाव को श्रोता तक पहुंचाने की क्षमता भी थी। यही वजह है कि प्रेम, विरह, भक्ति, देशभक्ति और जीवन के अलग-अलग भावों वाले उनके गीत दशकों बाद भी सुने जाते हैं।
पीएम मोदी और लता मंगेशकर का विशेष रिश्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लता मंगेशकर के बीच व्यक्तिगत स्नेह और सम्मान का रिश्ता रहा। लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने एक लेख में बताया था कि लता उन्हें प्यार से ‘नरेंद्र भाई’ कहती थीं और दोनों के बीच भाई-बहन जैसा स्नेह था।
प्रधानमंत्री ने भी कई मौकों पर लता मंगेशकर के साथ अपने संबंधों को याद किया है। 2024 में उनकी जन्म-जयंती पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि लता दीदी के साथ उनका विशेष रिश्ता था और उन्हें उनका स्नेह व आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।
6 फरवरी 2022 को हुआ निधन
लता मंगेशकर का 6 फरवरी 2022 को मुंबई में निधन हुआ। उनके निधन पर प्रधानमंत्री मोदी समेत देशभर के नेताओं, कलाकारों और करोड़ों प्रशंसकों ने शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारतीय संस्कृति की ऐसी महान हस्ती बताया था, जिनकी मधुर आवाज आने वाली पीढ़ियों को भी मंत्रमुग्ध करती रहेगी।
आज उनकी जन्म-जयंती पर एक बार फिर उनकी आवाज, उनकी संगीत साधना और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। लता मंगेशकर भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत आज भी करोड़ों लोगों की स्मृतियों और भावनाओं का हिस्सा हैं।



