राधे पटेल / गरियाबंद नमस्कार, NEWS VEB की इस इन-डेप्थ स्पेशल रिपोर्ट में हम आज उस कहानी की तह तक जाएंगे जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। कैसे एक बिना हाथ-पैर वाली लड़की दुनिया की सबसे खतरनाक और सटीक तीरंदाज बन गई? आइए, इस पूरे मामले को सिलसिलेवार और साफ-साफ समझते हैं।
चौंकाने वाला मामला: वो मनहूस दिन जिसने जिंदगी बदल दी
पायल नाग मूल रूप से ओडिशा के बलांगीर जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर (राजमिस्त्री) हैं। बचपन गरीबी में बीत रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पायल जब महज 8 साल की थीं, तब उनके साथ एक खौफनाक हादसा हुआ। वह एक हाई-टेंशन बिजली के तार की चपेट में आ गईं (Electrocuted)। करंट इतना तेज था कि डॉक्टरों को पायल की जान बचाने के लिए उनके दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े। पायल अब पूरी तरह से ‘Limbless’ (बिना अंगों की) हो चुकी थीं।

बड़ा खुलासा: जब कमजोरी ही बन गई सबसे बड़ी ताकत
हादसे के बाद कोई भी आम इंसान जिंदगी से हार मान लेता। लेकिन पायल ने अपने हालात से समझौता नहीं किया। जब उनके पास हाथ नहीं थे, तो उन्होंने अपने मुंह से ब्रश पकड़कर पेंटिंग करना शुरू किया। यही उनका टर्निंग पॉइंट था।
साल 2023 में सोशल मीडिया पर उनकी एक पेंटिंग वाली वीडियो वायरल हुई।
इस वीडियो पर द्रोणाचार्य जैसे कोच कुलदीप वेदवान की नजर पड़ी। (यह वही कोच हैं जिन्होंने बिना हाथों वाली मशहूर तीरंदाज शीतल देवी को वर्ल्ड चैंपियन बनाया है)। कोच कुलदीप ने पायल की आंखों में वो आग देख ली थी जो एक चैंपियन में होती है। उन्होंने पायल से संपर्क किया और उन्हें पैरा-तीरंदाजी (Para Archery) की दुनिया में कदम रखने का रास्ता दिखाया।
कठिन तपस्या: बिना अंगों के धनुष कैसे उठाया?

एक ऐसा खेल जिसमें हाथों की उंगलियों की पकड़ और पैरों के संतुलन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वहां बिना हाथ-पैर वाली पायल का टिकना असंभव लग रहा था। लेकिन कोच कुलदीप ने उनके लिए खास तकनीक ईजाद की। पायल ने अपने शरीर (धड़) के संतुलन और मुंह/कंधे की ताकत का इस्तेमाल करते हुए धनुष चलाना सीखा। उनकी ट्रेनिंग में बेतहाशा दर्द और पसीना शामिल था, लेकिन उनकी जिद उनके दर्द से कहीं बड़ी थी।
बैंकॉक में रचा इतिहास और महिंद्रा का सलाम
पायल की इस खामोश तपस्या का नतीजा शनिवार (अप्रैल 2026) को पूरी दुनिया ने देखा। बैंकॉक में आयोजित ‘वर्ल्ड पैरा तीरंदाजी सीरीज फाइनल’ में पायल नाग उतरीं। उनका मुकाबला किसी और से नहीं, बल्कि अपनी ही आइडल (आदर्श) और वर्ल्ड चैंपियन शीतल देवी से था। पायल ने अपने अचूक निशानों से शीतल देवी को हरा दिया और गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह दुनिया की पहली ‘बिना हाथ-पैर वाली’ तीरंदाज बन गईं जिन्होंने गोल्ड जीता।

इस अकल्पनीय जीत के बाद, देश के दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया (X) पर पूरी कहानी बयां करते हुए लिखा— “जब भी मैं निराश होता हूँ या खुद पर तरस खाता हूँ, तो पायल की कहानी देखता हूँ। यह चैंपियन सिर्फ सोमवार का मोटिवेशन नहीं, बल्कि मेरी जिंदगी के हर एक दिन की प्रेरणा है।”



