60 लाख की चार KM की PMGSY सड़क विभागीय अनदेखी के कारण चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट

गरियाबंद । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) भारत की ग्रामीण विकास की एक महत्वपूर्ण योजना है, जो ग्रामीण क्षेत्र की रीढ़ मानी जाती है जिसमें अब तक लाखों किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया है और गांवों को ऑल-वेदर कनेक्टिविटी प्रदान की है। हाल के आंकड़ों (दिसंबर 2025 तक) के अनुसार, योजना के तहत कुल 8,25,114 किमी सड़कों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 7,87,520 किमी पूर्ण हो चुकी हैं। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार पहुंच के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हुई है।
हालांकि मुद्दा खराब गुणवत्ता, निर्माण सामग्री की कमी, समय पर मरम्मत न होना, भारी वाहनों और बारिश से क्षति, गड्ढे और कीचड़ बनना, तथा जवाबदेही की कमी दिखाई दे है । बता दे की गरियाबंद जिले के अंतर्गत 30 किलोमीटर की दूरी बिंद्रानवागढ़ से जाने वाली गांव सातधार महेंद्रगढ़ के प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत लगभग 4 किलोमीटर की दूरी सड़क को प्रशासकीय स्वीकृति 60 लाख बताई जा रही है जहां पर सड़क निर्माण में गुणवत्ता ही सड़क का निर्माण किया गया है जो जिसका निर्माण लगभग 15 से 20 दिनों के अंतर्गत हुई थी और अब यह सड़के उखड़ने लगी है क्योंकि विभागीय अनदेखी की वजह से यह सड़क के समय से पहले उखड़ने लगी है। जहां गुणवत्ता संबंधी समस्याएं कई मामलों में निर्माण मानकों का पालन नहीं हो रहा है। प्रधानमंत्री सड़कों पर निम्न-गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग होता चला आ रहा है, जिससे सड़कें कुछ ही महीनों में टूट-फूट जाती हैं क्योंकि खराब निर्माण गुणवत्ता, सामग्री की कमी और रखरखाव की कमी चिंता का विषय बना हुआ है।
रखरखाव की कमी:
निर्माण के बाद रखरखाव राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है, कि ठेकेदारों की लापरवाही या प्राथमिकता न होने से मरम्मत समय पर नहीं होती। भारी वाहन (ओवरलोडिंग) और मानसून से क्षति बढ़ जाती है।
परिणाम ग्रामीणों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं (एम्बुलेंस), स्कूल जाने और बाजार पहुंच में कठिनाई होती है, जिससे आर्थिक नुकसान भी होता है। चूंकि ऐसे निर्माण में ठेकेदार/अधिकारी जवाबदेह होते हैं।

