16वें वित्त आयोग की राशि एक सप्ताह में जारी करने की मांग; मूलभूत मद में कटौती बंद करने और निर्माण कार्यों की फाइलों का 15 दिनों में निराकरण करने की रखी मांग
गरियाबंद। जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के संचालन और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में आ रही वित्तीय एवं प्रशासनिक समस्याओं को लेकर जिला सरपंच संघ ने आवाज उठाई है। संघ के जिलाध्यक्ष हरीश साहू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित राशि जारी करने तथा पंचायतों से जुड़ी फाइलों का समय-सीमा में निराकरण करने की मांग की।
सरपंच संघ का कहना है कि विभिन्न मदों की राशि समय पर उपलब्ध नहीं होने और निर्माण कार्यों की फाइलें लंबित रहने से पंचायत स्तर पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। संघ ने 16वें वित्त आयोग की राशि, मनरेगा के लंबित भुगतान और मूलभूत मद की राशि जारी करने के साथ ही शासकीय शिविरों एवं आयोजनों का खर्च पंचायतों पर डालने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की मांग की है।
एक सप्ताह में जारी हो 16वें वित्त आयोग की राशि
सरपंच संघ ने ग्राम पंचायतों में लंबित विकास कार्यों को गति देने के लिए 16वें वित्त आयोग की राशि एक सप्ताह के भीतर जारी करने की मांग की। संघ के अनुसार, राशि उपलब्ध नहीं होने से पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्य कराने में परेशानी हो रही है।
केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-27 से 2030-31 के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को अनुदान देने की व्यवस्था की है। छत्तीसगढ़ के लिए भी इस अवधि में अनुदान की सिफारिश की गई है। हालांकि, जिले की पंचायतों को कितनी राशि लंबित है और उसके जारी होने की स्थिति क्या है, यह संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से स्पष्ट होगा।
मनरेगा के लंबित भुगतान सात दिन में करने की मांग
ज्ञापन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत पूर्ण हो चुके और भुगतान के लिए लंबित कार्यों की राशि सात दिनों के भीतर जारी करने की मांग की गई है। सरपंच संघ का कहना है कि भुगतान में देरी होने से पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन और कार्यों के संचालन में दिक्कतें आती हैं।
संघ ने प्रशासन से मांग की कि लंबित भुगतान की स्थिति की समीक्षा कर पात्र मामलों में नियमानुसार जल्द राशि जारी की जाए, ताकि पंचायतों के कामकाज में अनावश्यक बाधा न आए।
मूलभूत मद की राशि में कटौती बंद करने की मांग
सरपंच संघ ने मूलभूत मद की राशि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने और उसमें अनावश्यक कटौती बंद करने की मांग भी उठाई। संघ के अनुसार, पंचायतों को गांवों की वास्तविक जरूरतों के मुताबिक विकास कार्य कराने के लिए समय पर वित्तीय संसाधन मिलना जरूरी है।
ज्ञापन में मांग की गई कि मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए आवश्यक राशि एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाए।
शासकीय आयोजनों का खर्च पंचायतों पर न डालें
संघ ने जिला और जनपद स्तर पर आयोजित होने वाले शासकीय कार्यक्रमों एवं शिविरों के खर्च को लेकर भी आपत्ति जताई। सरपंचों का कहना है कि ऐसे आयोजनों के लिए पंचायतों पर आर्थिक निर्भरता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि संबंधित विभाग अपने कार्यक्रमों के लिए नियमानुसार बजट और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करें, ताकि पंचायतों के सीमित वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
निर्माण कार्यों की फाइलों का 15 दिन में हो निराकरण
ज्ञापन में निर्माण कार्यों से संबंधित लंबित फाइलों के निराकरण और उन्हें आगे भेजने के लिए अधिकतम 15 दिनों की समय-सीमा निर्धारित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही मूल्यांकित और पूर्ण हो चुके कार्यों की लंबित राशि एक सप्ताह के भीतर संबंधित खातों में जमा कराने की मांग रखी गई।
सरपंच संघ का कहना है कि फाइलों के निराकरण में देरी से कार्यों की प्रक्रिया प्रभावित होती है। समय-सीमा तय होने से पंचायतों को प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता मिलेगी और लंबित मामलों की निगरानी भी आसान होगी।
सरपंच संघ के पदाधिकारी रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला सरपंच संघ के कार्यकारी अध्यक्ष कोमल देव ध्रुव, छुरा ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष एवं सचिव, मैनपुर ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल में संरक्षक पन्ना लाल ध्रुव, सचिव पवन सिंह यादव, कोषाध्यक्ष हलमन ध्रुवा तथा जिला उपाध्यक्ष पद्मा मोती निषाद (फिंगेश्वर), घनश्याम मरकाम (मैनपुर), चम्पेश्वर ध्रुव (छुरा), नरेंद्र ध्रुव (गरियाबंद) और रोशनी प्रधान (देवभोग) सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।
अब सरपंच संघ की इन मांगों पर जिला प्रशासन और जिला पंचायत की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पंचायत प्रतिनिधियों की नजर रहेगी।



