करका क्षेत्र में गर्डलिंग के शिकार 3,500 से अधिक पेड़ों को बचाने की पहल; वैज्ञानिक तकनीक से होगा उपचार, वनकर्मियों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका क्षेत्र में गर्डलिंग के कारण सूखने की कगार पर पहुंचे पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग ने उपचार अभियान शुरू किया है। पेड़ों के संरक्षण के लिए कर्नाटक से ट्री डॉक्टर विजय निशांत टाइगर रिजर्व पहुंच गए हैं। उनके मार्गदर्शन में आज से गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों की वैज्ञानिक सर्जरी शुरू की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य उन पेड़ों को नया जीवन देना है, जिनके तनों की छाल को चारों ओर से काट दिए जाने के कारण उनके प्राकृतिक पोषण का प्रवाह प्रभावित हुआ है।
वन क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान 3,500 से अधिक पेड़ों के गर्डलिंग से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें साल, बीजा और तेंदू जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। वन विभाग अब विशेषज्ञ की मदद से इन पेड़ों की स्थिति का आकलन कर उनके उपचार की दिशा में काम कर रहा है।
ब्रिज ग्राफ्टिंग से पेड़ों को बचाने की कोशिश
गर्डलिंग में पेड़ के तने के चारों ओर की छाल को काट दिया जाता है। इससे पत्तियों में बनने वाले पोषक तत्वों का जड़ों तक पहुंचना बाधित हो सकता है और धीरे-धीरे पेड़ सूखने लगता है। यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाए, तो प्रभावित पेड़ के जीवित रहने की संभावना कम हो सकती है।
ऐसे पेड़ों को बचाने के लिए ब्रिज ग्राफ्टिंग जैसी वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें तने के क्षतिग्रस्त हिस्से के ऊपर से जीवित ऊतक का वैकल्पिक संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जाता है, ताकि पोषक तत्वों का प्रवाह दोबारा शुरू हो सके। हालांकि, उपचार की सफलता पेड़ की प्रजाति, क्षति की गंभीरता और उसकी मौजूदा स्थिति पर निर्भर करती है।
ट्री डॉक्टर विजय निशांत प्रभावित पेड़ों का निरीक्षण कर उनकी स्थिति के अनुसार उपचार करेंगे। इस दौरान पेड़ों को बचाने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
स्थानीय वनकर्मियों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य केवल प्रभावित पेड़ों का उपचार करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए वनकर्मियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाना भी है। विजय निशांत उपचार की प्रक्रिया और उसके बाद पेड़ों की देखभाल व निगरानी के तरीके बताएंगे। विभाग स्थानीय आदिवासी समुदायों के पारंपरिक वन संरक्षण ज्ञान को भी इस पहल से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
महानदी के उद्गम क्षेत्र के जंगलों को बचाने की पहल
करका क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के महत्वपूर्ण वन क्षेत्र में आता है। यहां के जंगल जैव विविधता और महानदी के उद्गम क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन के लिहाज से अहम हैं। वन विभाग के सामने एक ओर गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों को बचाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर वनभूमि पर अतिक्रमण और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर रोक लगाने की जिम्मेदारी भी है।
अब विशेषज्ञ की मौजूदगी में शुरू हो रहा यह उपचार अभियान कितना सफल रहता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उम्मीद है कि वैज्ञानिक तकनीक और नियमित निगरानी से अधिक से अधिक प्रभावित पेड़ों को बचाया जा सकेगा।





