मैनपुर ब्लॉक की खजुरपदर पंचायत का मामला; वार्ड क्रमांक 8 के पंच संतोष कुमार बीसी का 31 मार्च 2026 को हुआ था निधन
गरियाबंद। जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खजुरपदर से प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां वार्ड पंच के निधन के महीनों बीत जाने के बाद भी संबंधित विभागीय अधिकारियों तक समय पर सूचना नहीं भेजी गई। नतीजतन, आगामी त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव की सूची से इस रिक्त पद का नाम ही गायब है। पंचायत सचिव की इस कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है और पंचायती राज व्यवस्था के मैदानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
31 मार्च को हुआ था पंच का निधन, विभाग को नहीं भेजी गई सूचना
ग्राम पंचायत खजुरपदर के वार्ड क्रमांक 8 के निर्वाचित पंच संतोष कुमार बीसी का निधन 31 मार्च 2026 को हो गया था। पंचायती राज अधिनियम और प्रशासनिक नियमानुसार, किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के असामयिक निधन या पद रिक्त होने की दशा में ग्राम पंचायत सचिव को तत्काल उच्चाधिकारियों व निर्वाचन शाखा को मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होता है। इसके आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग संबंधित रिक्त पद को आगामी उपचुनाव की सूची में दर्ज करता है।

आरोप है कि खजुरपदर के पंचायत सचिव रूपेंद्र यादव ने पंच के निधन की जानकारी समय पर विकासखंड और जिला पंचायत के सक्षम अधिकारियों को नहीं दी। इसी गंभीर लापरवाही के चलते वार्ड क्रमांक 8 का नाम उपचुनाव की अधिकृत सूची में शामिल होने से छूट गया।
सूची से नाम गायब होने पर ग्रामीणों में नाराजगी
उपचुनाव की अधिसूचना और सूचियां सार्वजनिक होने के बाद जब खजुरपदर के वार्ड 8 का नाम गायब मिला, तो स्थानीय ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर लंबे समय से वार्ड का प्रतिनिधित्व शून्य है, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं। समय पर जानकारी नहीं देने से वार्ड में दोबारा चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई है।
अब यह जांच का विषय है कि क्या यह सचिव की व्यक्तिगत लापरवाही थी या फिर उच्च स्तर पर दस्तावेज पहुंचने के बावजूद सूची में नाम दर्ज नहीं किया गया।
क्या कहते है जिला के जिम्मेदार
“ग्राम पंचायत खजुरपदर के वार्ड क्रमांक 8 में पंच के निधन के बाद भी उपचुनाव की सूची में नाम शामिल न होने का मामला संज्ञान में आया है। पंचायत स्तर से सूचना प्रेषित करने में कहां चूक हुई है, इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि पंचायत सचिव या संबंधित कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो विधिवत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
— प्रखर चंद्राकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत गरियाबंद




