महासमुंद। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच धान खरीदी और राजस्व व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। महासमुंद के पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार के अव्यावहारिक आदेशों के कारण किसानों और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी के ठीक पहले पटवारियों की हड़ताल से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
पीवी ऐप की तकनीकी समस्याओं को लेकर विरोध
विनोद चंद्राकर के अनुसार, राजस्व पटवारी संघ पीवी ऐप यानी फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप के माध्यम से फसलों के डिजिटल सर्वेक्षण और जीपीएस फोटो अपलोड करने की अनिवार्यता का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐप में सर्वर डाउन होने, लोकेशन मैच नहीं होने और फसलों के भौतिक सत्यापन के दौरान व्यावहारिक दिक्कतें आने की शिकायतें हैं।
चंद्राकर का आरोप है कि पटवारी संघ ने इन समस्याओं से पहले ही सरकार को अवगत कराया था, लेकिन समय रहते समाधान नहीं निकाला गया। इसी कारण पटवारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने पटवारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2026 में छत्तीसगढ़ में पटवारियों ने पीवी ऐप की तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं और सेवा संबंधी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। इस आंदोलन से फसल सत्यापन और राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों की बढ़ी चिंता
पूर्व विधायक ने कहा कि हड़ताल का असर उन किसानों पर पड़ सकता है, जो समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड दुरुस्त कराने में जुटे हैं। उनके अनुसार, फौती दर्ज नहीं होने, नामांतरण, बंटवारा और भूमि रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार जैसे मामलों में देरी होने से किसानों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसानों के भूमि रिकॉर्ड और पंजीयन संबंधी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हुईं, तो कुछ किसानों को धान बेचने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, धान खरीदी पर वास्तविक असर कितना पड़ेगा, यह संबंधित प्रक्रियाओं और प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।
राजस्व प्रकरण और प्रमाण पत्रों के काम प्रभावित होने का आरोप
चंद्राकर ने कहा कि पटवारी प्रतिवेदन नहीं मिलने से तहसीलदार और एसडीएम कार्यालयों में राजस्व प्रकरणों के निराकरण में बाधा आ सकती है। उन्होंने धारा 115 के तहत लंबित प्रकरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि नए प्रतिवेदन समय पर नहीं पहुंचने से मामलों के निपटारे में और देरी होने की आशंका है।
उन्होंने यह भी कहा कि जाति, मूल निवास और अन्य प्रमाण पत्र बनवाने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पटवारियों की हड़ताल लंबी चलने पर आम नागरिकों के भूमि संबंधी कार्यों और प्रमाण पत्रों के सत्यापन पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार से वार्ता और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने सरकार से मांग की कि पीवी ऐप से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जाए तथा पटवारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर गतिरोध खत्म किया जाए। उन्होंने तकनीकी बाध्यताओं पर पुनर्विचार करने और किसानों के हित में गिरदावरी तथा पंजीयन की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो धान खरीदी के साथ-साथ फसल नुकसान के सर्वेक्षण और अन्य राजस्व कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों और आम लोगों को राहत देने की जरूरत
पटवारियों की हड़ताल के बीच प्रशासन के सामने राजस्व सेवाओं को सुचारु बनाए रखने और किसानों से जुड़े जरूरी कार्य समय पर पूरे करने की चुनौती है। एक ओर पटवारी पीवी ऐप की समस्याओं और लंबित मांगों का समाधान चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों को धान खरीदी से पहले जरूरी दस्तावेज और फसल सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने की चिंता है।
अब देखना होगा कि सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं और किसानों सहित आम नागरिकों को राहत देने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।


