मैनपुर | सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र (जिला धमतरी व गरियाबंद) की रूढ़िगत ग्राम सभाओं के महासंघ ‘जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति’ के छत्र – छाया तले आगामी 17 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को एक विशाल महाग्राम सभा का आयोजन किया जा रहा है।यह बैठक गरियाबंद जिले के मैनपुर तहसील अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य ग्राम कोकड़ी के शासकीय स्कूल के खेल मैदान में सुबह 10:00 बजे से आयोजित होगी। ‘जल जंगल जमीन बचाओ संघर्ष समिति’ ने भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को “संवैधानिक संरक्षक” के रूप में उपस्थित रहने हेतु खुला निमंत्रण पत्र जारी किया है।
महाग्रामसभा का आयोजन ही क्यों ?
इससे पूर्व में भी बीते दिन में 128 गावो के लोगो का जनसैलाब (विशाल महा बैठक ) राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम मोंगराडीह में दिनांक 10 अक्टूबर दिन शनिवार को आयोजित की गई थी , जिसमे विस्थापन नहीं विकास चाहिए जैसी बाते सामने आई थी महाग्राम सभा का आयोजन का मुख्य उद्देश्य –
- विस्थापन पर पूर्ण रोक: एनटीसीए (NTCA) गाइडलाइन और वन अधिकार अधिनियम की धारा 4(2) के अनुसार ग्राम सभा की लिखित सहमति के बिना किसी भी परिवार को नहीं हटाया जा सकता। टाइगर रिजर्व के नाम पर बनाए जा रहे कथित मौखिक दबाव को सुप्रीम कोर्ट के ‘समता जजमेंट’ व अनुच्छेद 19(5) का उल्लंघन बताते हुए विस्थापन पर रोक लगाने की मांग की गई है।
- शाम 7 बजे चेक पोस्ट बंद करने का आदेश निरस्त हो: वन विभाग द्वारा शाम 7:00 बजे के बाद तौरेंगा एवं अन्य टाइगर रिजर्व क्षेत्रो में आवागमन रोके जाने को पेसा (PESA) कानून की धारा 4(घ) का उल्लंघन बताया गया है। इससे आपात स्थिति में बीमार व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं व क्षेत्र के ग्रामीण किसानो को हो रही भारी परेशानियों का हवाला देकर इस प्रतिबंध को तत्काल हटाने की मांग रखी गई है।
- मूलभूत सुविधाओं की बहाली: संविधान के अनुच्छेद 21 (‘प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण’) और पेसा की धारा 4(ज) (लघु जल निकायों) का उल्लेख करते हुए समिति ने कहा कि क्षेत्र के 128 गांवों में आज भी सड़क, बिजली, पुल-पुलिया और नेटवर्क जैसी अहम प्राथमिक सुविधाओं का अभाव है, जिसे अविलंब दूर किया जाए।
- ग्राम गणराज्य बोर्ड की स्थापना: पांचवीं अनुसूची पैरा 5 के अंतर्गत शांति व सुशासन के अधिकारों के तहत हर गांव में ‘ग्राम गणराज्य बोर्ड’ लगाए जाने का निर्णय लिया गया है।
- वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलना: वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 3(1)(झ) के तहत क्षेत्र के सभी वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित कर ग्रामीणों को भू-स्वामी अधिकार देने की मांग उठाई गई है।
लोक सभा न राज्य सभा सबसे बड़ा ग्राम सभा
संघर्ष समिति का कहना है कि सीतानदी उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी 128 ग्राम, पारा और टोला पांचवीं अनुसूची में अधिसूचित हैं, जहां पेसा अधिनियम 1996 के तहत ग्राम सभा ही सक्षम सरकार है। सुप्रीम कोर्ट के समता जजमेंट का हवाला देते हुए समिति ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी समुदाय का प्राथमिक अधिकार है।
इस बैठक में बड़े – बड़े जनप्रतिनिधि होंगे शामिल
बैठक एवं अपनी मांगो को शासन स्तर तक पहुंचने के लिए संघर्ष समिति ने आमंत्रण पत्र कांकेर सांसद भोजराज नाग, महासमुंद सांसद रूप कुमारी चौधरी, बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक राम ध्रुव, सिहावा विधायक अंबिका मरकाम, जिला पंचायत धमतरी अध्यक्ष अरुण सार्वा, जिला पंचायत गरियाबंद अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप सहित नगरी व मैनपुर के जनपद व जिला पंचायत सदस्यों तथा ग्राम सभा अध्यक्षों और पंच-सरपंचों को भेजा गया है। जिनके समक्ष संघर्ष समिति अपने हक़ अधिकार से खुलकर करेंगे चर्चा !
क्या संघर्ष समिति कि मांगे होगी पूरी ?
राजापड़ाव क्षेत्र एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रो ने आये दिन विकास के वादे हि देखे है , यह बैठक पहली बार नहीं है और न ही इनकी मांगे पहली बार है इससे पहले भी राजापड़ाव क्षेत्र के लोगो ने कई बार शासन प्रशासन से अपनी मांग सुशासन तिहार , जनसमस्या निवारण शिविरों में अपनी मांगो को प्रमुखता से रखा है ख़ून से प्रधानमंत्री के नाम पर चिट्ठी भी लिखी है , अपने हक़ अधिकार के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ी है अब देखना यह होगा की क्या इस क्षेत्र के निवासरत ग्रामीणों को कभी बिजली पानी नेटवर्क जैसे अहम सबसे जरुरी सुविधा मिल पाती है या वन विभाग के विस्थापन नीति अंतर्गत विस्थापन को बाध्य होंगे।



