मैनपुर | गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गौरगांव के आश्रित ग्राम लाटापारा में शिक्षकों की अन्यत्र प्रतिनियुक्ति को लेकर ग्रामीणों और पालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजे जाने से स्थानीय हाई स्कूल की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि विद्यालय में 49 विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी अब केवल एक शिक्षक के भरोसे है।
शिक्षकों की वापसी की मांग को लेकर ग्रामीण एक बार फिर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पास ज्ञापन सौंपने पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने से विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है।
75 स्कूल एकल शिक्षकीय, 6 स्कूलों में शिक्षक नहीं होने का दावा
जिले की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गरियाबंद जिले में 75 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं, जबकि 6 माध्यमिक एवं हाई स्कूलों के शिक्षक विहीन होने की बात सामने आई है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
इसके बावजूद कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिले में शिक्षकों की उपलब्धता और पदस्थापना की समीक्षा की जा रही है, तब दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक क्यों नहीं हैं?
दिए गए आंकड़ों में 5 शिक्षकों को अतिशेष यानी सरप्लस बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिक्षक उपलब्ध हैं, तो जरूरत वाले विद्यालयों में उनकी तैनाती कर विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई की सुविधा दी जानी चाहिए। इन आंकड़ों की विभागीय पुष्टि और विद्यालयवार स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
लाटापारा हाई स्कूल में दो शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से बढ़ी परेशानी
मैनपुर विकासखंड का लाटापारा क्षेत्र दूरस्थ एवं अनुसूचित क्षेत्र में आता है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां पहले से ही शिक्षकों की कमी की समस्या रही है। इसके बीच विद्यालय में पदस्थ दो महत्वपूर्ण शिक्षकों को अन्य संस्थानों में भेजे जाने से स्थिति और गंभीर हो गई।
जानकारी के मुताबिक, शासकीय हाई स्कूल लाटापारा में पदस्थ अंग्रेजी व्याख्याता कमलेश सरानी की प्रतिनियुक्ति स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, गरियाबंद में कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी वापसी अब तक नहीं हुई है।
इसी तरह, जुलाई में पदस्थ प्राचार्य/व्याख्याता गजानंद सोनवानी को प्रशासनिक आधार पर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिंदी माध्यम विद्यालय, नगरी भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, इन दोनों शिक्षकों के जाने के बाद विद्यालय में केवल एक शिक्षक के भरोसे 49 विद्यार्थियों की पढ़ाई संचालित हो रही है। इससे विषयवार अध्यापन और पढ़ाई की नियमितता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला, फिर भी ग्रामीणों को इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षकों की वापसी को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और मैनपुर के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को कई बार आवेदन दिया जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से पालकों में नाराजगी है।
मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष संजय नेताम ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिक्षकों की वापसी की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार आवेदन देने के बाद भी जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे दोबारा ज्ञापन सौंपने पहुंचे।
क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी?
इस पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने बताया कि फिलहाल विद्यालय में दो शिक्षकों की तात्कालिक व्यवस्था की गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह व्यवस्था कितने समय के लिए की गई है और लाटापारा हाई स्कूल में नियमित रूप से पर्याप्त शिक्षकों की पदस्थापना कब तक होगी।
ग्रामीणों की मांग—स्थायी रूप से हो शिक्षकों की पदस्थापना
ग्रामीणों और पालकों की मांग है कि लाटापारा हाई स्कूल से अन्यत्र प्रतिनियुक्त किए गए शिक्षकों की वापसी कराई जाए अथवा उनके स्थान पर योग्य शिक्षकों की स्थायी व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का समान अवसर मिलना चाहिए।
गरियाबंद जिले में शिक्षकों की पदस्थापना और उपलब्धता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जून 2025 में शासन की ओर से जिले के 16 शिक्षक विहीन विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति किए जाने की जानकारी दी गई थी। ऐसे में लाटापारा का मामला शिक्षक व्यवस्था की समीक्षा और वास्तविक जरूरत के अनुसार पदस्थापना की आवश्यकता को सामने लाता है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग की तात्कालिक व्यवस्था से विद्यार्थियों की पढ़ाई कितनी सुचारु होती है और ग्रामीणों की स्थायी समाधान की मांग पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।




