सरपंच के निधन के करीब तीन महीने बाद भी पद खाली, जर्जर पंचायत भवन में ताला; ग्रामीणों के घर और चौक-चौराहे बने पंचायत कार्यालय
गरियाबंद। सरकार गांवों में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ उनके घर-द्वार तक पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड की कुहीमाल ग्राम पंचायत की जमीनी तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मैनपुर ब्लॉक मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित इस पंचायत में आज हालात ऐसे हैं कि यहां न तो निर्वाचित सरपंच है और न ही काम करने लायक पंचायत भवन। पंचायत का कामकाज ग्रामीणों के घरों और चौक-चौराहों से संचालित करने की मजबूरी बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ग्रामीण अपनी पंचायत की समस्याएं लेकर जाएं तो जाएं कहां?
तीन महीने से सरपंच का पद खाली
ग्रामीणों के मुताबिक करीब तीन महीने पहले ग्राम कुहीमाल के सरपंच का निधन हो गया था। इसके बाद से पंचायत में अब तक नया सरपंच नहीं होने की बात सामने आ रही है।
यानी जिस पंचायत का नेतृत्व ग्रामीणों द्वारा चुना गया प्रतिनिधि करता है, वहां करीब तीन महीने से यह पद खाली पड़ा है।
ऐसे में पंचायत के विकास कार्यों, ग्रामीणों की शिकायतों और स्थानीय स्तर पर होने वाले जरूरी निर्णयों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, सरपंच पद रिक्त होने की स्थिति में प्रशासनिक स्तर पर पंचायत संचालन के लिए लागू वैधानिक व्यवस्था और वैकल्पिक प्रभार की स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है। संबंधित जनपद पंचायत से यह भी पूछा जाना चाहिए कि कुहीमाल में सरपंच पद रिक्त होने के बाद अब तक आगे की प्रक्रिया किस स्तर पर है।
पंचायत भवन नहीं, घरों में चल रहा कामकाज
कुहीमाल की दूसरी बड़ी समस्या पंचायत भवन को लेकर है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत का भवन पूरी तरह जर्जर हालत में पहुंच चुका है। भवन की स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि वहां बैठकर पंचायत का नियमित कामकाज करना मुश्किल है।
इसके चलते पंचायत से जुड़े कामों के लिए ग्रामीणों को कभी किसी के घर तो कभी चौक-चौराहों पर जाना पड़ता है।
सोचिए, जिस पंचायत भवन में ग्रामीणों को अपनी समस्याओं का समाधान मिलना चाहिए, उसी पंचायत का कामकाज अगर लोगों के घरों और सार्वजनिक स्थानों पर चलाना पड़े तो यह व्यवस्था की कैसी तस्वीर पेश करता है?
प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर पंचायत भवन के स्थान पर नए भवन अथवा आवश्यक निर्माण के लिए अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
यदि यह स्थिति सही है तो सवाल सीधे संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर उठता है—आखिर पंचायत भवन की जर्जर स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं निकला?
पंचायत भवन सिर्फ एक इमारत नहीं होता। यही वह जगह है जहां ग्रामीणों से जुड़े दस्तावेज, योजनाओं की जानकारी, पंचायत के प्रस्ताव और विकास कार्यों से संबंधित प्रशासनिक गतिविधियां संचालित होती हैं।
कागजों में पंचायत, जमीन पर व्यवस्था गायब?
मैनपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत 74 ग्राम पंचायतें हैं। आधिकारिक जिला वेबसाइट भी मैनपुर विकासखंड में 74 ग्राम पंचायतें और 179 गांव दर्ज करती है।
इन पंचायतों में कुहीमाल भी शामिल है। उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड में कुहीमाल ग्राम पंचायत से जुड़ी प्रशासनिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है।
लेकिन आज सवाल यह है कि क्या केवल सरकारी रिकॉर्ड में पंचायत का नाम होना पर्याप्त है?
अगर पंचायत में निर्वाचित सरपंच का पद रिक्त है, पंचायत भवन जर्जर है और ग्रामीणों को अपने ही घरों अथवा चौक-चौराहों पर पंचायत का कामकाज करवाने की मजबूरी है, तो फिर पंचायती राज व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल उठना लाजिमी है।
अधिकारियों के लिए पांच सीधे सवाल
पहला सवाल— सरपंच के निधन के बाद करीब तीन महीने से पद रिक्त है तो वैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे क्या कार्रवाई की गई?
दूसरा सवाल— पंचायत भवन जर्जर होने की जानकारी संबंधित जनपद और जिला प्रशासन को कब से है?
तीसरा सवाल— नए पंचायत भवन के लिए प्रशासनिक स्वीकृति अब तक क्यों नहीं मिली?
चौथा सवाल— पंचायत के नियमित कामकाज के लिए ग्रामीणों को घरों और चौक-चौराहों पर क्यों भटकना पड़ रहा है?
पांचवां सवाल— क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पंचायत की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया है?
ग्रामीणों की परेशानी को अब नजरअंदाज करना मुश्किल
कुहीमाल के ग्रामीणों की परेशानी केवल एक भवन या एक पद तक सीमित नहीं है। यह सवाल ग्रामीण प्रशासन की पहुंच और जवाबदेही से जुड़ा है।
दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों के लिए पंचायत ही शासन की सबसे पहली सीढ़ी होती है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर पेंशन, आवास, राशन, सड़क, नाली, रोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े कामों के लिए ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर ही सहारा चाहिए।
ऐसे में पंचायत का स्थायी कार्यालय न होना और सरपंच का पद लंबे समय तक रिक्त रहना ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकता है।
अब पंचायत को अधिकारी कब देंगे अपना ठिकाना?
कुहीमाल की तस्वीर सरकार और प्रशासन के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर रही है—क्या दूरस्थ गांव होने के कारण यहां की समस्याएं भी दूर रख दी गई हैं?
ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत भवन की स्थिति का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, नए अथवा सुरक्षित पंचायत भवन के लिए आवश्यक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाए और सरपंच पद रिक्त होने के बाद लागू प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट किया जाए।
कुहीमाल की कहानी सिर्फ एक पंचायत भवन के जर्जर होने की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था की कहानी है, जहां ग्रामीणों की पंचायत मौजूद है, पंचायत का नाम सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद है, लेकिन जमीन पर पंचायत को चलाने के लिए न सरपंच नजर आ रहा है और न ही ढंग का पंचायत कार्यालय।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों की यह आवाज जनपद पंचायत से जिला प्रशासन तक कब पहुंचती है और कुहीमाल पंचायत को उसका स्थायी कार्यालय और प्रभावी नेतृत्व कब मिलता है।



