कुम्हडईखुर्द में बाढ़ का कहर, करीब 70 किसानों के प्रभावित होने की बात; महीनों की मेहनत और लागत पानी में डूबी, अब मुआवजे की आस में किसान
देवभोग। गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद तेल नदी में आई बाढ़ ने नदी किनारे खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कुम्हडईखुर्द के पास तेल नदी में बाढ़ का पानी खेतों तक पहुंचने से फसलों को भारी नुकसान होने की बात सामने आई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पुराने पुल के आसपास बाढ़ के साथ बहकर आए मलबे, कचरे और डस्ट के जमा होने से पानी के बहाव पर असर पड़ा और नदी का पानी खेतों की ओर फैल गया।
हालांकि, पानी का रुख बदलने और पुराने पुल के कारण नुकसान बढ़ने के आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच एवं स्थल निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी। हाल में हुई भारी बारिश के दौरान देवभोग क्षेत्र में नदी-नालों के उफान और खेतों के जलमग्न होने की जानकारी भी सामने आई है।
बाढ़ आई और किसानों की महीनों की मेहनत बह गई
किसानों ने फसल तैयार करने के लिए महीनों तक मेहनत की। बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई में पैसा लगाने के बाद जब खेतों में फसल लहलहाने लगी, तो अचानक आई बाढ़ ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
कुम्हडईखुर्द क्षेत्र के नदी किनारे स्थित खेतों में पानी भरने से खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई किसानों के लिए यह नुकसान सिर्फ खेत की फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कृषि सीजन की कमाई पर संकट खड़ा हो गया है।
पुराने पुल के आसपास जमा मलबे को लेकर सवाल
तेल नदी पर स्थित पुराने पुल के आसपास बाढ़ के दौरान बड़ी मात्रा में कचरा और डस्ट जमा हो गया। उनका दावा है कि इससे पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट आई और नदी का पानी आसपास के खेतों की ओर फैल गया।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि पुल के आसपास जमा मलबे और कचरे को पहले हटा दिया जाता तथा बाढ़ से पहले आवश्यक इंतजाम किए जाते, तो क्या फसल के नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था।
फिलहाल इन दावों की प्रशासनिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुल और मलबे की वजह से कितना नुकसान हुआ, यह स्थल निरीक्षण और तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
करीब 70 किसान प्रभावित होने की बात
तेल नदी के किनारे स्थित खेतों में बाढ़ के पानी से करीब 70 किसानों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ा है।
किसानों की मांग है कि राजस्व विभाग की टीम जल्द से जल्द खेतों का सर्वे करे और प्रत्येक प्रभावित किसान के वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए।
किसान बोले- अब अगली खेती की चिंता
पीड़ित किसानों का कहना है कि खेती में पहले ही बड़ी लागत लग चुकी थी। फसल खराब होने के बाद अब दोबारा खेती के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री जुटाना मुश्किल होगा।
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि नुकसान का सर्वे केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर पहुंचकर खेतवार वास्तविक नुकसान दर्ज किया जाए। इसके बाद शासन के नियमों के तहत उन्हें फसल क्षति की राहत राशि उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीण केशरी यादव ने बताई मौके की स्थिति
स्थानीय ग्रामीण केशरी यादव के अनुसार पुराने पुल के आसपास जमा मलबे के कारण बाढ़ के दौरान पानी के बहाव में बदलाव देखने को मिला। उनका कहना है कि प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाना चाहिए कि पानी खेतों की ओर क्यों पहुंचा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
तहसीलदार बोले- नुकसान का आकलन कर तैयार होगी मुआवजे की फाइल
इधर देवभोग तहसीलदार सुशील कुमार भोई ने बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर नियमानुसार क्षतिपूर्ति प्रकरण तैयार किए जाने की बात कही है। हालिया बाढ़ के दौरान तहसीलदार प्रशासनिक टीम के साथ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंचे थे। प्रशासन की ओर से पटवारियों के माध्यम से नुकसान का आकलन कराने की जानकारी भी सामने आई है।
अब कुम्हडईखुर्द के किसान प्रशासनिक सर्वे का इंतजार कर रहे हैं। किसानों की उम्मीद है कि खेतों में हुए नुकसान का वास्तविक आंकलन जल्द पूरा होगा और शासन की राहत प्रक्रिया के तहत उन्हें समय पर मुआवजा मिल सकेगा।
बाढ़ ने फिर खड़ा किया नदी किनारे खेती और पुल की व्यवस्था का सवाल
देवभोग क्षेत्र में इस मानसून के दौरान लगातार बारिश से नदी-नालों के उफान और खेतों में पानी भरने की स्थिति सामने आई है। कुम्हडईखुर्द में सामने आई स्थिति ने एक बार फिर नदी के बहाव, पुराने पुल के रखरखाव और बाढ़ से पहले जल निकासी की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन केवल तत्काल राहत तक सीमित न रहे, बल्कि तकनीकी स्तर पर भी स्थिति की जांच कर भविष्य में किसानों की फसल को बाढ़ के पानी से बचाने के उपाय सुनिश्चित करे।




