आदिवासी बालक आश्रम भाटीगढ़ में लगने वाली हाई मास्क लाइट का काम पिछले कई महीनों से ठप पड़ा है, जिसने प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले इस आश्रम में सरकारी योजना के तहत लाइट लगाने का सामान महीनों पहले पहुँच चुका है। इसके बावजूद, आज तक वहां अंधेरा छाया हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब सामान उपलब्ध है, तो इसे लगाने में देरी क्यों हो रही है? क्या बच्चों को इसी तरह अंधेरे में रहने के लिए मजबूर किया जाएगा?

सरकारी योजना पर लापरवाही का ग्रहण
मैनपुर क्षेत्र के आदिवासी बालक आश्रम भाटीगढ़ में छात्रों की सुविधा और सुरक्षा के लिए हाई मास्क लाइट मंजूर की गई थी। योजना के मुताबिक, आश्रम परिसर को रोशन करने के लिए जरूरी उपकरण और सामान मौके पर भेज दिए गए हैं। लेकिन विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि सामान धूल खा रहा है और इंस्टालेशन का काम शुरू तक नहीं हुआ।
आश्रम में रहने वाले आदिवासी बच्चों को रात के समय काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जंगली क्षेत्र होने के कारण हमेशा जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में लाइट का न होना बच्चों की सुरक्षा के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।

पैरी उद्गम मार्ग पर होने से बढ़ जाती है अहमियत
यह आश्रम केवल एक शैक्षणिक संस्थान ही नहीं है, बल्कि इसकी भौगोलिक स्थिति इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। आदिवासी बालक आश्रम भाटीगढ़ पवित्र पैरी नदी के उद्गम स्थल जाने वाले मार्ग पर स्थित है। यहाँ हर दिन 100 से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए गुजरते हैं।
अगर यह हाई मास्क लाइट लग जाती है, तो इसका फायदा केवल आश्रम के बच्चों को ही नहीं, बल्कि उन तमाम श्रद्धालुओं और राहगीरों को भी मिलेगा जो देर शाम इस रास्ते से गुजरते हैं। पूरा रास्ता प्रकाशित होने से आपराधिक गतिविधियों और हादसों पर भी रोक लग सकेगी। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे बैठा है।

जिम्मेदार कौन: विभाग या ठेकेदार?
इस अधूरे काम का जिम्मेदार कौन है? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इसकी सुध लेना उचित नहीं समझा? सामान आने के बाद भी काम का रुकना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं निगरानी की कमी है।
सामान की बर्बादी: खुले में पड़ा सरकारी सामान खराब हो सकता है, जिससे जनता के पैसे की बर्बादी होगी।
अंधेरे में आश्रम: बच्चे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के लिए रोशनी के मोहताज हैं।
अधिकारियों की खामोशी: मामला सामने आने के बाद भी अब तक किसी ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे जिम्मेदारों ने अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली है।
जन-प्रतिनिधियों और प्रशासन से सवाल
विकासखंड मैनपुर के प्रशासनिक ढांचे पर यह एक बड़ा सवाल है। जब सरकार आदिवासी कल्याण और ग्रामीण विकास की बातें करती है, तो आदिवासी बालक आश्रम भाटीगढ़ जैसे संस्थानों में ऐसी लापरवाही क्यों? क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है?
यहाँ के स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मांग है कि इस अधूरे काम को तुरंत पूरा किया जाए। हाई मास्क लाइट लगने से पूरे परिसर की तस्वीर बदल जाएगी और सुरक्षा का एहसास होगा।
भाटीगढ़ का यह आदिवासी आश्रम आज प्रशासन की अनदेखी का शिकार है। आदिवासी बालक आश्रम भाटीगढ़ में हाई मास्क लाइट का लगना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि वहां के बच्चों का अधिकार है। यदि जल्द ही इसे नहीं लगाया गया, तो यह साफ़ हो जाएगा कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों पर ही चमकती हैं, जमीन पर नहीं। अब देखना यह है कि कब प्रशासन अपनी नींद से जागता है और इस अंधेरे को दूर करता है।


