सुकमा: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद संवेदनहीन तस्वीर सामने आई है। Sukma Hospital Negligence और पोस्टमार्टम (PM) में अत्यधिक देरी से नाराज परिजनों ने गुरुवार को जिला अस्पताल के सामने शव रखकर उग्र प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन के कारण घंटों तक सड़क पर तनाव की स्थिति बनी रही।

क्या है पूरा मामला?
किरकिपाल निवासी फूल कुमार बघेल की नदी में डूबने से असामयिक मौत हो गई थी। नियमानुसार शव को पोस्टमार्टम के लिए पहले छिंदगढ़ अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उसे सुकमा जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू नहीं की।
शव सड़क पर रखकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी
अस्पताल और प्रशासन की कथित उदासीनता से तंग आकर परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। गुरुवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी की अगुवाई में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय और जिला अस्पताल के मुख्य मार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
“एक गरीब परिवार के मृतक का समय पर पोस्टमार्टम तक नहीं हो पा रहा है, यह सुकमा की स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी तरह से विफलता को दर्शाता है। प्रशासन की यह उदासीनता न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि अमानवीय भी है।” – हरीश कवासी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
प्रशासनिक दावों की खुली पोल
प्रदर्शन के दौरान हरीश कवासी ने सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन Sukma Hospital Negligence की यह घटना जमीनी हकीकत बयां कर रही है। परिजनों को एक दिन से ज्यादा समय तक अपने प्रियजन के शव के लिए इंतजार करना पड़ा, जो प्रशासनिक विफलता का चरम है।
चेतावनी: उग्र आंदोलन की तैयारी
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस देरी के लिए जिम्मेदार अस्पताल के अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। कवासी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ और दोषियों को सजा नहीं मिली, तो कांग्रेस पार्टी पूरे जिले में उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।
देर शाम प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और जल्द प्रक्रिया पूरी करने के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, लेकिन इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


