संजय नेताम ने उठाई गरियाबंद के किसानों की आवाज — धान व मक्का खरीदी में भारी अव्यवस्था

मैनपुर । कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि गरियाबंद जिले में धान खरीदी केंद्रों से धान का उठाव बेहद धीमी गति से हो रहा है, जिससे हजारों किसान गंभीर संकट में हैं। किसान दिन-दिन भर कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन समय पर उठाव नहीं होने से उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।
नेताम ने कहा कि इस गंभीर समस्या से लगातार जिला प्रशासन एवं कलेक्टर को अवगत कराया गया है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। यह प्रशासनिक उदासीनता सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को उजागर करती है।
आज भी सैकड़ों किसानों का रकबा काट दिया गया है। सुधार हेतु तहसील और जिला स्तर पर आवेदन दिए गए हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
वनाधिकार पट्टा धारक किसानों ने बैंक से कर्ज लिया है, लेकिन इस वर्ष उनका पंजीयन ही काट दिया गया है। अब सवाल यह है कि जब किसान धान बेच ही नहीं पाएंगे तो कर्ज चुकाएंगे कैसे? जबकि पूर्व वर्षों में इन्हीं किसानों का नियमित पंजीयन होता रहा है।
नेताम ने आगे कहा कि प्रतिवर्ष सरकार द्वारा मक्का की खरीदी की जाती थी, लेकिन इस वर्ष मक्का की खरीदी पूरी तरह बंद कर दी गई है। जबकि गरियाबंद जिले के मैनपुर और देवभोग ब्लॉक में 20 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में किसानों द्वारा मक्का की खेती की जाती है। सरकारी खरीदी न होने के कारण किसान मजबूर होकर व्यापारियों को औने-पौने दामों में मक्का बेचने को विवश हैं।
भाजपा सरकार मंचों से कहती है कि वह किसानों की आय दुगुनी करेगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि किसान अपने ही हक के लिए जिला और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं।
नेताम ने कहा कि यह पूरी स्थिति भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीति, प्रशासनिक विफलता और जमीनी हकीकत से कटे हुए शासन का स्पष्ट प्रमाण है।
संजय नेताम ने शासन प्रशासन से मांग की कि धान उठाव की प्रक्रिया तुरंत तेज की जाए, काटे गए रकबों का तत्काल सुधार किया जाए, वनाधिकार पट्टा धारक किसानों का पंजीयन तुरंत बहाल किया जाए, मैनपुर और देवभोग सहित पूरे जिले में मक्का की सरकारी खरीदी तत्काल शुरू की जाए।
लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
नेताम ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो किसानों के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

